| 1. वेदः |
निम्नलिखित में से किसी एक वेद शाखा का चयन करें:
- ऋग्वेद: ऋग्वेदसंहितायाः सस्वरायाः प्रथममण्डलम् (सूक्तानि – 1,3,17,19,20,40,43,50,89,95-99,114-115,122,142,154,156) एवं पाणिनीयशिक्षा (सम्पूर्णा)
- शुक्लयजुर्वेद (माध्यन्दिनशाखीय): क) शुक्लयजुर्वेदसंहितायाः सस्वरायाः 1-5 अध्यायाः, ख) याज्ञवल्क्यशिक्षा
- कृष्णयजुर्वेद (तैत्तिरीयशाखीय): क) तैत्तिरीयशाखायाः प्रथमकाण्डम्, ख) व्यासशिक्षा
- सामवेद: क) सामवेदसंहितायाः सस्वरायाः पूर्वार्चिकस्य 1-2 प्रपाठकौ, ख) नारदीयशिक्षा
- अथर्ववेद (शौनकशाखीय): क) अथर्ववेदसंहितायाः सस्वरायाः 1-2, ख) माण्डूकीशिक्षा
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| 2. आयुर्वेदः |
| अष्टांगहृदयम् - दिनचर्या (द्वितीयोऽध्यायः) | 40 |
| अजीर्णामृतमंजरी (सम्पूर्ण) | 20 |
| योगशतम् (1-50 श्लोकाः) कण्ठस्थीकरणम् | 20 |
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| 3. प्राचीनव्याकरणम् |
| अष्टाध्यायीभाष्य प्रथमावृत्ति (अध्याय 1-2) | - |
| पदच्छेद विभक्ति, समास, अर्थोदाहरण | 10 |
| सिद्धिकार्य (पदकार्य) | 10 |
| आख्यातिक (भ्वादिगण) | 20 |
| अव्ययार्थ (सम्पूर्ण) | 25 |
| अन्य विधियाँ / परिभाषा ज्ञान | 05 |
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| 4. नव्यव्याकरणम् |
सिद्धान्तकौमुदी से:
| संज्ञाप्रकरणम् | 10 |
| सन्धिप्रकरणम् | 20 |
| अजन्तप्रकरणम् | 25 |
| हलन्तपुल्लिंगप्रकरणतः अव्ययप्रकरणपर्यन्तम् | 25 |
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| 5. साहित्यम् |
| मध्यमव्यायोगः (भास) | 30 |
| रघुवंशमहाकाव्यम् (प्रथम सर्गः) | 30 |
| काव्यदीपिका (1-3 शिखा) | 20 |
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| 6. न्यायः |
न्यायसिद्धान्तमुक्तावली (प्रत्यक्षखण्डः) |
80 |
| 7. दर्शनम् |
तर्कसंग्रहः - पदकृत्यम् (सम्पूर्णम्) |
80 |
| 8. ज्योतिषम् |
लीलावती (सम्पूर्णम्) एवं मुहूर्तचिन्तामणिः (संक्रान्तिप्रकरणपर्यन्तम्) |
80 |
| 9. जैनदर्शनम् |
रत्नकरण्डकश्रावकाचारः (समन्तभद्राचार्यकृतः सम्पूर्णः) |
80 |
| 10. पुराणेतिहासः |
वाल्मीकिरामायणस्य प्रथमः सर्गः एवं महाभारतस्य शीलनिरूपणाध्यायः |
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| 11. प्राकृतं तथा जैनागमः |
दव्यसंगहो (मुनिनेमिचन्द्रकृत सम्पूर्ण):
| शब्दार्थसहिता व्याख्या | 50 |
| संस्कृतेन अथवा हिन्दीभाषया अनुवादः | 30 |
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