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| पत्रसङ्केतः | पाठ्यक्रमविवरणम् | क्रेडिट् | यूनिट् | होरा |
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| DSCC 20 | आधुनिकहिन्दुविधिः (MODERN HINDU LAW) | |||
| पाठ्यग्रन्थः: आधुनिकहिन्दुविधिः (प्रो. किशोरचन्द्रमहापात्रः) | ||||
| C-1 (क.) हिन्दुविधेरुत्पत्तिः क्रमविकासश्च (ख) प्राचीनार्वाचीनहिन्दुविवाहविध्योस्तुलनात्मकमध्ययनम् |
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| C-2 प्राचीनार्वाचीनहिन्दुदत्तकविध्योस्तुलनात्मकमध्ययनम् |
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| C-3 प्राचीनार्वाचीनहिन्दूत्तराधिकारविध्योस्तुलनात्मकमध्ययनम् |
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| C-4 (क.) प्राचीनार्वाचीनहिन्दुभरणपोषणविध्योस्तुलनात्मकमध्ययनम् (ख) हिन्दुदेवोत्तरविधिः |
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आधारग्रन्थाः– 1. आधुनिकहिन्दुविधि - Dr. Paras Diwan, Allahabad Law Agency U.P 2. Mulla Principles of Hindu Law, S.T. Desai, N.M. Tripathi, Private Limited , Bombay-1990 3. आधुनिकहिन्दुविधि – प्रो. वेदप्रकाश उपाध्यायः 4. हिन्दुसंस्कार – डॉ. राजबली पाण्डेय, चौखम्बाविद्याभवन, वाराणसी, 1985 5. दत्तकमीमांसा – नन्दपण्डितः 6. दत्तकचन्द्रिका – आनन्दाश्रममुद्रणालय, पुना, 1978 7. Studies in Hindu Law by CSU, Ganganath Jha Campus, Varanasi, 1912 8. मनुस्मृतिः 9. याज्ञवल्क्यस्मृतिः 10. दायभागविमर्शः - प्रो. ललितकुमारसाहुः, Purusottama Research Academy of Indology, Puri, Kalia D.T.P Center Mahodadhi Market, Mochi Sahi, Puri, 2010 11. हिन्दु आइनर क्रमविकाश – श्रीकुञ्जविहारी पण्डा, बि.एन् प्रीण्टर्स, कटक, 1989 |
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| DSCC 21 | वैदिकविषयाः | |||
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पाठ्यग्रन्थाः– वैदिकवाङ्मयस्येतिहासः – डॉ. जगदीशचन्द्रमिश्रः- चौखम्बासुरभारती प्रकाशन वैदिक साहित्य एवं संस्कृति – बलदेवोपाध्याय ऋग्वेदभाष्यभूमिका - सायाणाचार्यः संस्कृतसाहित्येतिहासः – डॉ. रामचन्द्रमिश्रः |
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| C-1 वेदशब्दार्थः व्युत्पत्तिश्च। वेदानां परिचयः। वेदस्य रचनाकालः। वैदिकस्वरविचारः – उदात्तानुदात्तस्वरितश्च । |
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| C-2 वेदाङ्गानि 1. वेदाङ्गानां संक्षिप्तपरिचयः। शिक्षा । कल्पः । व्याकरणम् । निरुक्तम् । छन्दः । ज्योतिषम् । |
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| C-3 वैदिकशाखाभेदाः। प्रमुखभाष्यकाराः (सायणः, उव्वट, माधवः, स्कन्दस्वामी इत्यादिः)। ब्राह्मणग्रन्थानां परिचयः (शतपथ-गोपथ-तैत्तिरीय-ऐतरेय-ताण्ड्यब्राह्मणानि)। |
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| C-4 वेदानाम् आरण्यकभागः उपनिषद्भागश्च। आरण्यके पञ्चमहायज्ञाः। उपनिषदां परिचयः (कठोनिषत्, ईशावास्योपनिषत्, केनोपनिषत्) |
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आधारग्रन्थः – संस्कृत वाङ्मय का बृहद इतिहास प्रथम एवं द्वितीय खण्ड, उत्तरप्रदेश संस्कृत संस्थानम्, लखनऊ। ईशादि नौ उपनिषत्, गीताप्रेस। |
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| DSCC 22 | पालिप्राकृतविषयाः जैनबौद्धदर्शनञ्च । | |||
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पाठ्यग्रन्थाः - भाषाविज्ञानम् - भोलनाथतिवारी संस्कृतसाहित्येतिहासः – डॉ. रामचन्द्रमिश्रः भारतीय धर्मशाखायें और इनका इतिहास – वाचस्पति गैरोला |
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| C-1 प्राकृतभाषा – जैनदर्शनम् । प्राकृतभाषोत्पत्तिः, परिभाषा विकासश्च। आधुनिकभाषाविकासे प्राकृतभाषायाः योगदानम्। |
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| C-2 जैनतीर्थंकरस्येतिहासः। तीर्थंकरपरम्परा, ऋषभवदेवः, पार्श्वनाथः, महावीरः। जैनदर्शने नवपदार्थविमर्शः। |
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| C-3 पालिभाषा – बौद्धदर्शनम् पालिभाषोत्पत्तिः, परिभाषा, विकासश्च। पालिव्याकरणस्य सामान्यपरिचयः – सन्धिः, समासः, धातुगणः, शब्दरूपम्। |
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| C-4 बौद्धदर्शने विविधावधारणा – वैभाषिक-माध्यमिक-सौत्रान्तिक-योगाचारः। बौद्धस्य मौलिकशिक्षा – अष्टाङ्गिकमार्गः, सत्तायाः लक्षणानि, प्रतीत्यसमुत्पादः। |
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आधारग्रन्थाः– प्राकृत साहित्य का इतिहास - जगदीश चन्द्र मिश्र। |
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| DSCC 23 | धर्मविज्ञानम् (विधिशास्त्रम्) (JURISPRUDENCE) | |||
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पाठ्यग्रन्थाः - 1. An Introduction to Jurisprudence – (B.N.M Tripathy) 2. Salmond Jurisprudence – John Salmond, 12th edition, 1966 3. विधिशास्त्र एवं विधि के सिद्धान्त – डॉ. एन.वी. परांजपे, कानूनी पुस्तक विक्रेता तथा प्रकाशक, मोतीलाल नेहरू रोज, प्रयागराज 4. विधिशास्त्र – डॉ. टी.पी. त्रिपाठी – इलाहावाद लॉ एजेन्सी पब्लिकेशन्स, विधि-पुस्तक प्रकाशक 10, बनर्जी, रोड, इलाहाबाद-2 |
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| C-1 विधिशास्त्रस्य सामाजिकविज्ञान-समाजशास्त्र-मनोविज्ञान-इतिहास-अर्थशास्त्र-नीतिशास्त्र-राजनीतिशास्त्रादिभिः सम्बन्धः। विधिशास्त्राध्ययनस्योपयोगित्वं महत्त्वञ्च। |
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| C-2 हिन्दूविधिशास्त्रम्। विधिशास्त्रस्य विश्लेषणात्मकविचारधारा। |
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| C-3 विधिशास्त्रस्य ऐतिहासिकविचारधारा। विधेः उत्सः (विधानम्, प्राङ्न्यायः, आचारः, संविद्) |
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| C-4 प्राचीनावर्चानविधिशास्त्रयोः सन्तुलनम्। भारतीयविधिशास्त्रस्य नूतनायामाः। |
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आधारग्रन्थाः– 1. Hindu Jurisprudence – (P.N.Sen, Calcutta University, 2020) 2. धर्मविज्ञान – प्रथमखण्ड – श्री स्वामीदयानन्दजी महाराज, श्रावणीपुस्तकमाला, जगतगञ्ज, बनारस 3. प्राचीनभारतीयविधिव्यवस्था – मूरलीधरचतुर्वेदी, Eastern Book Company 4. विधिशास्त्रस्य मूलसिद्धान्ताः – अनिरूद्ध प्रसाद, पञ्चमसंस्करणं, Eastern Book Company. |
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| AEEC 4 | बहुशास्त्रीयविषयः-परम्परागतः (Multi-Disciplinary Subjects - Traditional ) (4.00) | |||
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| INTERNSHIP 3 | प्रशिक्षुता-सेवा (4 क्रेडिट्स) | |||
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