| यूनिट् | पाठ्यक्रमविवरणम् | क्रेडिट् | होरा |
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| C-1 | हिन्दुसमाजे व्रतोत्सवाः। कालनिर्णयः। व्रतशब्दार्थः। व्रतलक्षणम्। व्रतभेदाः। व्रताधिकारिणः। व्रतमहत्त्वम्। व्रतोत्सवानां कर्माङ्गकालनिर्णयः। | 1 | 16-20 |
| C-2 | जन्माष्टमी। राधाष्टमी। एकादशी। शिवरात्रिः। अनन्तव्रतम्। विनायकव्रतम्। वसन्तपञ्चमी। | 1 | 16-20 |
| C-3 | नागचतुर्थी। श्रीरामनवमी। नवरात्रम्। दशहरा। होलिकोत्सवः। दीपावलिः। करकचतुर्थी। | 1 | 16-20 |
| C-4 | जगन्नाथसंस्कृतिः: श्रीपुरुषोत्तमः श्रीमन्दिरञ्च। श्रीपुरुषोत्तममाहात्म्यम्। श्रीपुरुषोत्तमक्षेत्रस्य माहात्म्यम्। श्रीमन्दिरस्यैतिह्यम्। श्रीजगन्नाथस्य ऐतिहासिकस्वरूपम्। श्रीमन्दिरे शक्त्युपासना। श्रीमन्दिरशिल्पकलायां वैष्णवसंस्कृतिः। श्रीमन्दिरे देवदाशनृत्यम्। श्रीजगन्नाथस्य द्वादशयात्रा। श्रीमन्दिरे दैनिकपर्वपर्वाणि व्रतोत्सवाश्च। श्रीक्षेत्रे मठमन्दिराणि। श्रीजगन्नाथस्य वेशभूषा। श्रीजयदेवः। श्रीचैतन्यमहाप्रभुः। | 1 | 16-20 |
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| C-1 |
आत्मतत्त्वविमर्शः: वाक्सूक्तम्, देव्यथर्वशीर्षसूक्तम्, भगवद्गीता, अर्धनारीश्वरावधारणा (बृहदारण्यकोपनिषत्, १।४।३)। जैन-बौद्धदर्शने श्रीगुरुग्रन्थे च स्त्रीविमर्शः। वेदान्ते एकाग्रता, जैन-बौद्ध-न्याय-वैशेषिकशिखदर्शनेषु अन्तःसम्बन्धता-सर्वसमावेशितानां परिणामविचारः। |
1 | 16-20 |
| C-2 | भारतीयपरम्परासु पदार्थतत्त्वम्। प्रकृति एवं पञ्चमहाभूतानां स्वरूपम्। अष्टादशविद्यानां परिचयः, उपाङ्गानि तथा। | 1 | 16-20 |
| C-3 | वर्णधर्माः (बृहदारण्यकोपनिषत् – १।४।१०-१५), श्रीमद्भगवद्गीता च। मार्क्सवादः एवं समीक्षावादः। | 1 | 16-20 |
| C-4 | संरचनावादे आधारितभारतस्य चित्रणम्। स्वतन्त्रशोधोपरि पाश्चात्यप्रतिबन्धकतत्त्वम्। | 1 | 16-20 |
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| C-1 |
धर्मस्य परिभाषा (महाभारतम्, मनुस्मृतिः, वैशेषिकसूत्रम्, गीता-शाङ्करभाष्यम्)। धर्मप्रकाराः – प्रवृत्तिमूलकधर्मः, निवृत्तिमूलकधर्मः। सनातनधर्मेण सह जैन-बौद्ध-सिख धर्माणां संतुलनम्। |
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| C-2 | आपद्धर्म, समाजधर्मः, स्वधर्मः, वर्णाश्रमधर्मः। | 1 | 16-20 |
| C-3 |
कर्म – परिभाषाणां सर्वेक्षणम्। कर्म-विकर्म-अकर्म चेति (श्रीमद्भगवद्गीता ४।१६ शाङ्करभाष्यम्)। षड्विधकर्माणि – नित्य-नैमित्तिक-काम्य-निषिद्ध-प्रायश्चित्तोपासनानि। सकाम-निष्कामकर्म। |
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| C-4 |
क. धर्म-रिलिजन-पन्थ-मजहब-सम्प्रदायपदानां व्याख्या। ख. कर्मविपाकः, प्रायश्चित्तानि, चान्द्रायणम्, पराकव्रतञ्चेति। |
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| यूनिट् | पाठ्यक्रमविवरणम् | क्रेडिट् | होरा |
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| C-1 |
क. भारतीयस्थापत्योद्भवविकासश्च। ख. वैदिकसाहित्ये स्थापत्यस्वरूपम् (श्रौत-शुल्बसूत्राणां वर्णनम्)। बौधायन, कात्यायन, आपस्तम्ब शुल्बसूत्राणां सामान्यपरिचयः। ग. मौर्यप्रासादस्य एवं सिन्धुसभ्यतायाश्च स्थापत्यात्मकमध्ययनम्। |
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| C-2 |
मन्दिरस्थापत्ये प्रमुखा शैली – नागर, वेसर, द्राविड। कोणार्कः, सारनाथः, जगन्नाथः, ऐलोरा, महाबलीपुरम्, काञ्चीपुरम्, तञ्जौर, मदुरै इत्यादीनां स्थापत्यविचारः। दुर्गविधानम्। |
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| C-3 | भारतीयकला: नाट्यशास्त्रस्य दर्शन-गायन-वादन-नर्तनकलादीनि। नाट्यशास्त्रे दशरूपकाणां सामान्यपरिचयः। | 1 | 16-20 |
| C-4 | भाषाविज्ञानम्: भाषायाः परिभाषा वर्गीकरणञ्च। ध्वनेः वर्गीकरणम् (स्पर्शः, संघर्षः, अर्धस्वरः, स्वरश्च)। निरुक्तशास्त्रस्य निर्वचनसिद्धान्तः - "आचार्य, अग्नि, जातवेदस्, समुद्र" इत्यादिपदानां निर्वचनम्। नवव्याकरणानां संक्षिप्तपरिचयः (ऐन्द्रचान्द्रादयः)। | 1 | 16-20 |